आज अकस्मात ही याद आया
जिन्दगी का वह पल
जब किसी को पाया था
अपने ही जैसे विचारों से प्रबल ।।

आंखे नम हुई थीं उसके जज्बे को देखकर
क्योंकि मै भी चल पडी थी दशकों से
इस समस्या से झूझकर

क्या हमारा मिलना महज एक इतिफाक था
या ईशवर का दिया हुआ वरदान।
पता नहीं—-
पर मेरे अनुभवों में पाया उसने अपनी
उलझनों का समाधान।।

जिंदगी के इस सफर में कितने ही पल बीत गये
अच्छे बुरे पलों ने खट्टे मीठे अनुभव दिये।।

मुझे याद आता है उसका वह भोला चेहरा
जो अक्सर आगे बढने के लिये रहता था तत्पर

पता नहीं उसको मेरी जरुरत थी
या मुझको उसकी आवशयकता
लकिन इतना तो जानती हूं
उसकी भावनावों को मिली है सफलता।।

मेरा जीवन समर्पित है उनके लिए
जो तकते हैं मेरी राह हाथों में लिए जलते दिए

उषा जालपुरी